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बदरीनाथ में कांग्रेस की सियासी बिसात, गौरव फरस्वाण की दावेदारी से बढ़ी हलचल

by vasudevnews

गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव फरस्वाण ने सीट से अपनी दावेदारी सामने रखकर पार्टी के भीतर संभावित मुकाबले को नई दिशा दे दी है। करीब तीन दशक से कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहने और लगातार जनसंपर्क में बने रहने को उन्होंने अपनी दावेदारी का प्रमुख आधार बताया है।

बदरीनाथ सीट कांग्रेस के लिए अहम मानी जाती है। मौजूदा विधायक लखपत सिंह बुटोला की जीत के बाद अब 2027 के चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर टिकट और संभावित प्रत्याशी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। गौरव फरस्वाण का कहना है कि वह करीब 30 वर्षों से कांग्रेस संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्तरों पर संगठन के लिए काम करने के साथ क्षेत्र में अपना जनसंपर्क बनाए रखा है। उनका मानना है कि पार्टी को लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं के अनुभव और सक्रियता को भी टिकट चयन में प्राथमिकता देनी चाहिए।

फरस्वाण की दावेदारी सामने आने के बाद बदरीनाथ कांग्रेस में संभावित दावेदारों को लेकर हलचल बढ़ना तय माना जा रहा है। हालांकि मौजूदा विधायक लखपत सिंह बुटोला की दावेदारी स्वाभाविक रूप से मजबूत रहेगी। 2024 के उपचुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने पार्टी को यह सीट वापस दिलाई थी।

ऐसे में कांग्रेस के सामने 2027 में प्रत्याशी चयन को लेकर दोहरे समीकरण रहेंगे। एक ओर मौजूदा विधायक के प्रदर्शन और चुनावी जीत को आधार बनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से संगठन में सक्रिय नेताओं की दावेदारी भी पार्टी नेतृत्व के सामने होगी।

बदरीनाथ क्षेत्र में सड़क, रोजगार, पलायन, सीमांत क्षेत्रों का विकास, आपदा प्रबंधन, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय युवाओं से जुड़े मुद्दे आगामी चुनाव में अहम हो सकते हैं। ऐसे में पार्टी के लिए उम्मीदवार का जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ भी महत्वपूर्ण होगी।

गौरव फरस्वाण की दावेदारी को फिलहाल टिकट की औपचारिक दौड़ से अधिक 2027 के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यदि अन्य नेता भी खुलकर दावेदारी सामने रखते हैं तो कांग्रेस नेतृत्व के सामने सभी दावेदारों और संगठन को साथ लेकर चलने की चुनौती बढ़ सकती है।

फिलहाल बदरीनाथ सीट पर कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर शुरुआती सियासी हलचल शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व मौजूदा विधायक के प्रदर्शन, संभावित दावेदारों की सक्रियता, संगठनात्मक अनुभव और चुनावी समीकरणों में किसे प्राथमिकता देता है।