- उत्तराखंड बनेगा संतुलित और मानवीय विकास का राष्ट्रीय मॉडल – सचिव डॉ. आर राजेश कुमार
- स्वास्थ्य, आवास, डिजिटल सुशासन, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बताया अगले दशक की विकास यात्रा का आधार
- बोले – विकास केवल निर्माण नहीं, बल्कि बेहतर जीवन, अधिक अवसर और जनविश्वास का विषय
- गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता – सचिव डॉ. आर राजेश कुमार
देहरादून। सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और आपदा संबंधी चुनौतियों के बीच विकास, सुशासन और जनकेंद्रित नीति निर्माण का एक मजबूत मॉडल तैयार किया है। आने वाला दशक उत्तराखंड के लिए केवल विकास की गति बढ़ाने का नहीं, बल्कि उत्कृष्टता, समावेशिता, नवाचार और मानवीय विकास को नई ऊंचाई तक ले जाने का दशक होगा।
सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, प्रकृति, वीरता, लोकजीवन और जनशक्ति का अद्भुत संगम है। यही कारण है कि राज्य की विकास यात्रा केवल योजनाओं और भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक के जीवन में सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और अवसर बढ़ाने का माध्यम बन रही है।
एक उत्तरजन टुडे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड के सामने दुर्गम भूगोल, सीमित समतल भूमि, बिखरी आबादी, आपदा संवेदनशीलता और पलायन जैसी गंभीर चुनौतियां हमेशा रही हैं। इसके बावजूद राज्य ने यह सिद्ध किया है कि यदि संकल्प स्पष्ट हो, नीति संवेदनशील हो और शासन नवाचार के साथ आगे बढ़े, तो कठिन परिस्थितियों में भी विकास का नया मॉडल तैयार किया जा सकता है।
विकास यात्रा को बताया जनकेंद्रित बदलाव की कहानी
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड की उपलब्धियों को केवल भवनों, परियोजनाओं और घोषणाओं से नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि इस आधार पर देखा जाना चाहिए कि आम नागरिक के जीवन में कितनी सहजता, सुरक्षा और अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ संपर्क बेहतर हुआ, वहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच भी मजबूत हुई। डिजिटल माध्यमों ने शासन को अधिक पारदर्शी बनाया और नागरिकों का भरोसा बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि राज्य ने अपनी भौगोलिक परिस्थितियों को समझते हुए ऐसा विकास मॉडल तैयार किया, जिसमें पहाड़ की जरूरतें, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय जीवन की वास्तविक चुनौतियों को शामिल किया गया। उत्तराखंड की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि राज्य ने कठिन परिस्थितियों को विकास में बाधा नहीं, बल्कि नीति निर्माण की दिशा बनाया।
विरासत को सहेजते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ रहा उत्तराखंड : डॉ. आर राजेश कुमार
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि राज्य ने विकास को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान के विपरीत नहीं, बल्कि उसके साथ लेकर आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि एक ओर उत्तराखंड देवभूमि की गरिमा, समृद्ध लोकसंस्कृति, सैन्य परंपरा और प्रकृति-सम्मत जीवनदृष्टि को संजोए हुए है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक अवसंरचना, निवेश, डिजिटलीकरण और सेवा क्षमता के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य ने विकास और विरासत के बीच एक संतुलित मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसमें प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक पहचान को भी समान महत्व दिया गया है। उनके अनुसार यही संतुलन उत्तराखंड की सबसे बड़ी नीति-शक्ति है, क्योंकि विकास तभी सार्थक माना जा सकता है जब वह स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण और जनभावनाओं को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़े।
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड तीर्थ, योग, आध्यात्मिकता, वीरता, लोक परंपराओं और प्रकृति की भूमि के रूप में देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। ऐसे में विकास योजनाओं को भी इसी संवेदनशीलता और संतुलन के साथ लागू करना आवश्यक है, ताकि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे की पूरक बनकर राज्य को नई दिशा दे सकें।
पर्यटन को बताया राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों में पर्यटन प्रमुख है। चारधाम, हरिद्वार, ऋषिकेश, कुमाऊँ, गढ़वाल, हिमालयी क्षेत्र, ट्रेकिंग मार्ग, वन संपदा और वेलनेस परंपरा ने राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि अब पर्यटन केवल धार्मिक दर्शन का विषय नहीं रहा, बल्कि यह स्थानीय रोजगार, महिला स्वयं सहायता समूहों, होमस्टे, हस्तशिल्प, खाद्य सेवाओं, परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि पर्यटन को टिकाऊ, सुव्यवस्थित और स्थानीय समुदायों से जुड़ा मॉडल बनाया जाए, तो यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार बन सकता है।
सड़क, संपर्क और आधारभूत ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति
उन्होंने कहा कि किसी भी पर्वतीय राज्य की प्रगति उसकी कनेक्टिविटी और पहुंच पर निर्भर करती है। उत्तराखंड ने सड़क, परिवहन, सार्वजनिक सुविधाओं, शहरी अवसंरचना और नागरिक उपयोगिताओं के विस्तार में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि जहाँ संपर्क बेहतर होता है, वहाँ अवसर भी पहुंचते हैं। यही कारण है कि सड़क और सेवा – आधारित अवसंरचना का विस्तार शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार और प्रशासन के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और उद्यमिता को बताया भविष्य की ताकत
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड में जैविक कृषि, बागवानी, औषधीय पौधों, स्थानीय खाद्य उत्पादों, हस्तशिल्प और ग्रामीण सेवा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन क्षेत्रों को बाजार, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण, परिवहन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए, तो रोजगार और आय के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन आधारित उद्यमिता, वेलनेस, फार्मा और सेवा क्षेत्र भी तेजी से विकसित हो रहे हैं।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को बताया विकास की असली शक्ति
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। स्वयं सहायता समूहों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्थानीय उद्यमों ने राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा शक्ति है। यदि युवाओं को कौशल, डिजिटल अवसर, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय उद्यमिता से जोड़ा जाए, तो पलायन की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकास की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब युवाओं को अपने ही राज्य में भविष्य दिखाई दे।
डिजिटल सुशासन में तेजी से आगे बढ़ रहा उत्तराखंड
उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस उत्तराखंड की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। सेवाओं का ऑनलाइनकरण, प्रक्रियाओं का सरलीकरण और नागरिक – अनुकूल तंत्र ने प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य के लिए डिजिटल शासन विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यह दूरी, समय और लागत को कम करता है। भविष्य उन्हीं राज्यों का होगा जो नागरिकों तक सेवाओं को डिजिटल माध्यम से सहज रूप में पहुंचा सकेंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र को बताया विकास का मानवीय चेहरा
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति के बिना अधूरी है। स्वास्थ्य केवल सेवा नहीं, बल्कि जीवन, सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक न्याय का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सेवा का अर्थ केवल अस्पतालों की उपलब्धता नहीं, बल्कि समय पर पहुंच, विशेषज्ञ परामर्श, सुरक्षित रेफरल, दवा और जांच सेवाओं की निरंतर उपलब्धता भी है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार को बड़ी उपलब्धि बताया
उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव, मातृ सुरक्षा, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ने हजारों परिवारों में भरोसा पैदा किया है। विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन राज्य ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मां और स्वस्थ शिशु किसी भी राज्य की सबसे बड़ी सफलता का संकेत होते हैं।
गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता – डॉ. आर राजेश कुमार
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि उपकेंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का लगातार विस्तार इसी दिशा में किया जा रहा है, ताकि नागरिकों को उनके निकट ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में भौगोलिक कठिनाइयों और लंबी दूरी के कारण मरीजों को शहरों तक पहुंचने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य यह होना चाहिए कि सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाया जाए, न कि मरीजों को उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों तक आने के लिए मजबूर किया जाए। सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करने से छोटी बीमारियों का उपचार स्थानीय स्तर पर संभव हो रहा है, गंभीर मामलों की समय पर पहचान हो रही है ।
टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य मॉडल बनेगा भविष्य
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में तकनीक स्वास्थ्य सेवा के लिए विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। टेलीमेडिसिन, ई – परामर्श और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। इससे मरीजों का समय, धन और शारीरिक कष्ट कम होता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में टेली – आईसीयू, टेली – रेडियोलॉजी, टेली – ऑन्कोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं ने बढ़ाया जनविश्वास
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा, 104 हेल्पलाइन और खुशियों की सवारी जैसी व्यवस्थाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक उत्तरदायी बनाया है। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में नागरिक के मन में यह भरोसा होना चाहिए कि राज्य उसके साथ खड़ा है और यही किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
आयुष्मान उत्तराखंड बना आर्थिक सुरक्षा कवच
उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी का खर्च अक्सर परिवारों को आर्थिक संकट में डाल देता है। इसलिए स्वास्थ्य बीमा और आर्थिक सुरक्षा बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान उत्तराखंड योजना ने नागरिकों को आर्थिक स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिया है और समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया है।
आवास और शहरी विकास को बताया गरिमापूर्ण जीवन का आधार
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि सभ्य और संवेदनशील समाज केवल छत नहीं देता, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता, सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास भी देता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में सीमित भूमि, ढलानदार भूभाग, जलनिकासी, पार्किंग, यातायात और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शहरों का केवल विस्तार नहीं, बल्कि सुरक्षित, पर्यावरण – सम्मत और रहने योग्य विकास होना चाहिए।
संस्थागत ढांचे और नीतिगत सुधारों को बताया बड़ी उपलब्धि
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों, रेरा, मेट्रो रेल एवं भवन निर्माण निगम जैसे संस्थागत ढांचों ने शहरी विकास को अधिक संगठित और पारदर्शी बनाया है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2000 से अब तक विकास प्राधिकरणों द्वारा लगभग 1343 करोड़ रुपये से अधिक लागत के अवसंरचना विकास कार्य पूरे किए गए हैं, जबकि वर्ष 2017 से नवगठित जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के माध्यम से लगभग 176 करोड़ रुपये के कार्य किए गए हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों आवास निर्माणाधीन
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 15,960 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईएसबीटी एक्सटेंशन ट्रांसपोर्ट नगर आवासीय योजना के तहत 132 एमआईजी, 144 एलआईजी और 338 एचआईजी इकाइयों का निर्माण किया गया है, जबकि अन्य योजनाओं में भी सैकड़ों आवासीय इकाइयों पर कार्य प्रगति पर है।
डिजिटल अनुमोदन प्रणाली को मिली राष्ट्रीय पहचान
उन्होंने कहा कि भवन मानचित्र स्वीकृति, ऑनलाइन आवेदन, शुल्क भुगतान, डिजिटल सूचना और समयबद्ध निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं ने नागरिकों को पारदर्शी और सरल सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। WhatsApp आधारित सेवाएं, SMS और ईमेल सूचना, Self Certification तथा Preapproved Maps जैसी व्यवस्थाएं प्रशासनिक सुधार का उदाहरण हैं। Ease – App पोर्टल को SKOCH Platinum 2025 जैसे राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।
अगले 10 वर्षों के लिए रखा व्यापक विजन
सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि आने वाले दशक में उत्तराखंड को उत्कृष्टता, समावेशिता, नवाचार और सतत विकास के मॉडल पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना होना चाहिए –
- जहाँ स्वास्थ्य सेवाएं दूरी से न रुकें,
- जहाँ आवास केवल दीवारें नहीं बल्कि गरिमापूर्ण जीवन का आधार बने,
- जहाँ शहर सुव्यवस्थित और रहने योग्य हों,
- जहाँ तकनीक केवल सिस्टम में नहीं बल्कि नागरिकों के अनुभव में दिखाई दे,
- जहाँ पर्यटन स्थानीय समृद्धि का माध्यम बने,
- जहाँ युवा अपने राज्य में अवसर देखें,
- और जहाँ विकास प्रकृति तथा जनविश्वास के साथ आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि यदि नीति, तकनीक, समाज और प्रशासन साझा दृष्टिकोण के साथ कार्य करें, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश के लिए संतुलित, मानवीय और पर्यावरण – सम्मत विकास मॉडल बन सकता है।
